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सावन महीना क्यों होता हैं इतना खास शिवजी का

Publish On: 11/07/2025

सावन (श्रावण) महीना हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना होता है और इसे भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। यह महीना विशेष रूप से भक्ति, व्रत, और पूजा-पाठ का होता है। सावन आमतौर पर जुलाई से अगस्त के बीच पड़ता है, और इसमें विशेष महत्व सोमवार (श्रावण सोमवार) का होता है।

सावन महीने के बारे में विस्तार से:

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🌧️ प्राकृतिक विशेषताएँ:

सावन मानसून का मुख्य महीना है, जब प्रकृति हरी-भरी हो जाती है।

खेतों में हरियाली, नदियों में जल और वातावरण में ठंडक आ जाती है।

🕉️ धार्मिक महत्व:

यह महीना भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है।

भक्त विशेष रूप से श्रावण सोमवार को व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद आदि चढ़ाते हैं।

कांवड़ यात्रा का आयोजन होता है, जिसमें भक्त गंगाजल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।

🙏 महत्वपूर्ण पर्व और तिथियाँ (सावन में आने वाले):

हरियाली तीज: विवाहित महिलाएँ पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।

नाग पंचमी: नाग देवता की पूजा की जाती है।

रक्षा बंधन: भाई-बहन के प्रेम का पर्व।

श्रावण पूर्णिमा: उपनयन संस्कार व वेद अध्ययन की शुरुआत का दिन।

🌿 परंपराएँ और रीति-रिवाज़:

महिलाएँ झूला झूलती हैं, मेहंदी लगाती हैं और गीत गाती हैं।

व्रत, उपवास, और सात्विक भोजन का चलन होता है।

कई लोग इस महीने मांस-मदिरा का त्याग कर देते हैं।

📿 शिव की पूजा के कारण:

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले विष को जब शिव ने पी लिया था, तब उनकी तपन को कम करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया था।

इसलिए सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाना विशेष फलदायक माना जाता है।

बिलकुल! सावन महीने के बारे में और गहराई से जानकारी नीचे दी गई है:


🌿 सावन (श्रावण) माह की विस्तृत जानकारी:

🔱 1. धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व:

भगवान शिव का प्रिय मास:
श्रावण मास को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। शिवभक्त इस पूरे महीने भगवान शिव की पूजा करते हैं, खासकर सोमवार को।
कहा जाता है कि इस माह में की गई शिव आराधना का फल सौ गुना मिलता है।

शिव पार्वती विवाह की स्मृति:
पौराणिक मान्यता है कि सावन में ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी कारण यह महीना स्त्रियों के लिए भी विशेष होता है।


🙏 2. व्रत और पूजा विधियाँ:

🗓️ श्रावण सोमवार व्रत:

व्रती (व्रत रखने वाला) प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करता है।

शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जाता है।

बेलपत्र, धतूरा, आक, शमीपत्र, सफेद फूल, भस्म आदि अर्पित किए जाते हैं।

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हैं।

दिन भर उपवास रखा जाता है, शाम को फलाहार किया जाता है।

🌼 श्रृंगार और स्त्रियों के उपवास:

विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घायु के लिए सोमवार व्रत रखती हैं।

सावन के झूले, लोकगीत और मेंहदी का चलन बढ़ जाता है।


🛕 3. सावन में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व:

तिथि/पर्व विवरण

हरियाली तीज कुंवारी लड़कियाँ अच्छे वर की कामना करती हैं; विवाहित महिलाएँ पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
नाग पंचमी नाग देवता की पूजा होती है; सांपों को दूध पिलाया जाता है।
श्रावण अमावस्या पितरों के तर्पण और शिव पूजा का विशेष दिन।
रक्षा बंधन भाई-बहन के प्रेम का पर्व।
श्रावण पूर्णिमा उपनयन, वेदारंभ, और ऋषि पूजन का दिन; दक्षिण भारत में अवनी अविट्टम।


💧 4. कांवड़ यात्रा:

उत्तर भारत (उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, यूपी आदि) में लाखों कांवड़िए हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री आदि से गंगाजल लाकर अपने स्थानीय शिवालयों में चढ़ाते हैं।

ये भक्त पैदल यात्रा कर “बोल बम” के जयकारे लगाते हुए जाते हैं।


🌸 5. सावन की विशेष परंपराएँ:

महिलाएँ हरी चूड़ियाँ, हरी साड़ियाँ पहनती हैं – हरियाली का प्रतीक।

गाँवों में झूले पड़ते हैं, लोक गीत गाए जाते हैं:
“कांच ही बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए…”


🧘‍♂️ 6. सावन में क्या करना चाहिए:

शिव नाम का जाप करें – ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र।

संयमित जीवनशैली अपनाएँ, सात्विक भोजन करें।

किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन, मांस-मदिरा, और अधिक क्रोध से बचें।

नदी या कुएँ में स्नान कर दान-पुण्य करें।


📜 7. सावन माह की पौराणिक कथाएँ:

समुद्र मंथन कथा:
जब देव-दानवों ने समुद्र मंथन किया, तब हलाहल विष निकला। भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए वह विष पी लिया और उसे कंठ में धारण कर लिया। इसलिए उनका नाम नीलकंठ पड़ा।

पार्वती का व्रत कथा:
पार्वती जी ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए सावन मास में कठोर तप किया। अंततः भगवान शिव ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर विवाह का प्रस्ताव स्वीकार किया।